Urdu Poetry

 


अब सभी को छोड़ ख़ुद पे भरोसा कर लिया मैंने,
वो मैं जो मुझमें मरने को था ज़िंदा कर लिया मैंने।
~ वसीम बरेलवी

ये मैं ही था बचा के खुद को ले आया किनारे तक,
समंदर ने बहुत मौका दिया था डूब जाने का।
~ वसीम बरेलवी


और फ़राज़ चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझको,
माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया
~ अहमद फ़राज़


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